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GNCTD Bill 2021 : संसद में NCT बिल पास (Parliament passes National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2021)


GNCTD Bill 2021 : संसद में NCT बिल पास (Parliament passes National Capital Territory of Delhi (Amendment) Bill, 2021) | Bankersadda Hindi_1.1


What is the GNCTD Bill 2021? GNCTD Amendment Bill: All you need to know | GNCTD Bill passed in Rajya Sabha to give more powers to Delhi L-G

भारतीय संसद ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक, 2021 को राज्यसभा की सहमति के साथ पारित कर दिया है। इस अधिनियम को लोकसभा में पहले ही पारित किया जा चुका है।

इस नये विधेयक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम, 1991 में संशोधन किए गए हैं जो कि दिल्ली की निर्वाचित सरकार और उपराज्यपाल के मध्य सद्भावनापूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने में मदद करेंगे। संसद में पारित इस संशोधित विधेयक में कहा गया है कि दिल्ली की विधान सभा द्वारा बनाए गए किसी भी कानून में “सरकार” शब्द का अर्थ उपराज्यपाल होगा। 

 

NCT एक्ट में क्या संशोधन किया गया है ?

 

संशोधित विधेयक में किए गए प्रमुख परिवर्तन इस प्रकार हैं-

1. यह विधेयक आपातकालीन स्थिति में उपराज्यपाल को शक्ति प्रयोग करने का अवसर प्रदान करेगा।
2. किसी भी मंत्री या कैबिनेट द्वारा लिए गए निर्णय पर दिल्ली में निर्वाचित सरकार से पहले उपराज्यपाल की राय जानी जाएगी।
3. “सरकार” शब्द का प्रयोग अब उपराज्यपाल के लिए प्रयुक्त होगा।
4. उपराज्यपाल दिल्ली में निर्वाचित सरकार के दायरे से बाहर जाकर भी कानून बना सकता है।
5. कार्यपालिका के द्वारा किए गए सभी कार्य उपराज्यपाल के नाम पर किए जाएँगे।

6. दिल्ली सरकार को विधायिका से जुड़े फैसलों पर LG से 15 दिन पहले और प्रशासनिक मामलों पर करीब 7 दिन पहले मंजूरी लेनी होगी।

संशोधित विधेयक दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के उस दावे को भी मान्यता प्रदान करता है जिसमें उन्होंने कहा था कि “दिल्ली में सरकार का अर्थ उपराज्यपाल से है क्योंकि राष्ट्रपति अनुच्छेद 239 के तहत उपराज्यपाल को नियुक्त करता है तथा 239AA के तहत उपराज्यपाल सरकार की भूमिका अदा करता है।” इस विषय पर पहले ही बहुत विवाद हो चुका है क्योंकि संविधान में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए प्रयुक्त “सरकार” शब्द का सही अर्थ नहीं लिखा था।

संसद में 83 सदस्यों ने इस विधेयक को मंजूरी दी जबकि 45 सदस्य इस विधेयक के खिलाफ़ थे। कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी के साथ ही भारत की कई प्रमुख पार्टियों, DMK, RJD, शिव सेना, समाजवादी पार्टी, सी.पी.एम. आदि ने भी इस विधेयक का विरोध किया। उनका पक्ष है कि बीजेपी सरकार इस विधेयक को लाकर दिल्ली के नागरिकों द्वारा चयनित सरकार के अधिकारों को छीन रही है।

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