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मन के हारे हार है मन के जीते जीत! Failure मिलने के बाद डिप्रेस क्यों होना।

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 Failure मिलने के बाद डिप्रेस क्यों होना।- Motivational Article

सफलता असफलता जीवन का एक पड़ाव है बल्कि यूँ कहे असफलता सफलता की और ले जाने वाली सीढ़ी है। असफलता हमे सफलता के और भी पास ले आती है,लेकिन थोड़ी सी असफलता के बाद हम निराश हो जाते है। 

सब बेकार लगता है हम असफल होने पर हताश हो जाते है। जबकि, असफल होने पर हमें फिर से कोशिश करने के लिए, हमे आगे बढ़ना चाहिए।

असफ़ल होने पर हमें कुछ चीज़े है जो बिल्कुल भी नही करनी चाहिए जोकि इस प्रकार है:-

◆ असफलता का फेज हम सबके जीवन मे आता है इसमें कोई बिखर जाता है तो कोई निखर जाता है। हमे बिखरना बिल्कुल भी नही है।

◆ हम दूसरे के support को चाहते है और support ना मिलने पर टूट जाते है। 

◆ जब सफल होने का निर्णय हमने लिया है तो हमे अपने निर्णय की कद्र करनी चाहिए दूसरों के तानो को दिल पर नही लेना चाहिए।

◆ हर दिन रोने के बजाय अपने काम में डूब जाना चाहिए।

असफ़ल होने पर हमें कुछ चीज़े है जो करनी चाहिए जोकि इस प्रकार है:-

◆ अपने comfort zone से बहार निकलना चाहिए।

◆ लाइब्रेरी जॉइन कर ले और खूब पढ़ाई करे।

◆ हमेशा ध्यान रखे आप अकेले काफी है खुद के लिए। कोई आपको support करे या ना करे आप खुद बेस्ट हो।

◆ अंत मे बस इतना कहना चाहूंगी कि काम मे ऐसे लग जाओ की आसपास की दुनिया का आभास ही ना हो।

अंत में हम कह सकते हैं – 

“मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। कहे कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत।।” 

अर्थात- जीवन में जय और पराजय केवल मन के भाव हैं। यानी जब हम किसी कार्य के शुरू में ही हार मान लेते हैं कि हम सचमुच में ही हार जाते हैं। लेकिन अपनी मंजिल के लिए जब जूझते हैं, बार-बार गिर कर खड़े होते हैं, तो हमारा आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है।

इसके बाद जब मंजिल मिलती है, तो उसकी खुशी कई गुना होती है। इसलिए आपकी जीत या हार को कोई और तय नहीं कर सकता है। यह खुद आपके ऊपर निर्भर करता है। 

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