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Centre restore states’ power to identify OBCs: केंद्र ने ओबीसी की पहचान करने की राज्य की शक्ति को बहाल करने के लिए आर्टिकल 342A में किया संशोधन – करेंट अफेयर्स स्पेशल सीरीज

Centre restore states' power to identify OBCs: केंद्र ने ओबीसी की पहचान करने की राज्य की शक्ति को बहाल करने के लिए आर्टिकल 342A में किया संशोधन – करेंट अफेयर्स स्पेशल सीरीज | Bankersadda Hindi_1.1

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Centre amendment to Article 342A to restore states’ power to identify OBCs: केंद्र ने ओबीसी की पहचान करने की राज्य की शक्ति को बहाल करने के लिए आर्टिकल 342A में किया संशोधन

Centre restore states’ power to identify OBCs: केंद्र सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBCs) की पहचान करने वाली राज्यों की शक्ति को बहाल करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन को अंतिम रूप दिया है। इससे पहले इसे मई में सुप्रीम कोर्ट ने ये कहकर खारिज कर दिया था कि राज्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) की लिस्ट तय नहीं कर सकता हैं, बल्कि केवल राष्ट्रपति उस लिस्ट को नोटिफाई कर सकते हैं।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अनुच्छेद 342A में एक संशोधन तैयार किया है, जिसके तहत अब राज्य सरकार के पास संबंधित राज्य सूचियों में शामिल किए जाने के लिए ओबीसी या सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने की शक्ति होगी। जानकारो के मुताबिक, कानून मंत्रालय ने इस संशोधन की समीक्षा की है।

सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई के अपने फैसले में 102वें संविधान संशोधन को वैध करार दिया था लेकिन कोर्ट ने कहा कि राज्य सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) की लिस्ट तय नहीं कर सकती, बल्कि केवल राष्ट्रपति राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (एनसीबीसी) की सिफारिशों के आधार पर कौन से समुदायों को राज्य ओबीसी सूची में शामिल किया जाएगा, को तय कर सकते हैं। इस कदम से मराठा सरकार-राज्य में राजनीतिक रूप से प्रबल मुद्दा- को हवा दी हैं।

वर्ष 2018 में पारित 102 वें संवैधानिक संशोधन ने अनुच्छेद 342 के बाद दो खंडों के साथ अनुच्छेद 342A पेश किया था, जिसमें बताया गया था कि भारत के राष्ट्रपति राज्यपाल के परामर्श से सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को लिस्ट में शामिल करेंगे। यह संशोधन एक तीसरा खंड- अनुच्छेद 342 a (3) पेश करता है जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य सूची में ओबीसी को अधिसूचित करने की शक्ति राज्य सरकारों में निहित होगी, जिसे अब सरकार द्वारा तैयार किया गया है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि सरकार संवैधानिक संशोधन की पूरी तैयारी कर चुकी है। इसे पेश करने और पारित कराने के लिए समय राजनीतिक नेतृत्व को निर्धारित करना हैं। हालाँकि अभी इसे सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में अब तक संविधान संशोधन को पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है।

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