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गुरु नानक जयंती पर शुभकामनाएं

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सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की 550 वीं जयंती के शुभ अवसर पर आप सभी को शुभकामनाएं! इस समय देश भर में उत्सव मनाया जा रहा है, गुरु नानक देव सिख धर्म के पहले संस्थापक थे। गुरुनानक देव का जन्म सन 1469 ई. के कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को हुआ था, इसीलिए प्रत्येक वर्ष इस तिथि को गुरु नानक देव की जयंती मनाई जाती है।  इस वर्ष गुरु नानक जयंती 12 नवम्बर अर्थात आज मनाई जा रही है। 

इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें सिख अपने घरों को लड़ियों और अनेक जगमगाती लाइट से सुसज्जित करते हैं। यह प्रकाश अज्ञानता रुपी अन्धकार को दूर करके, ज्ञान रुपी प्रकाश की ओर ले जाने का प्रतीक स्वरूप है। देश भर के गुरुद्वारों को सजाया जाता है और उनपर कीर्तन और अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया  जाता है। इस दिन शोभायात्रा यात्रा निकाली जाती है। इस दिन सिख समुदाय के लोग गंगा स्नान को बहुत महत्वपूर्ण मानते है और जो लोग गंगा स्नान नहीं करने जा सकते वह किसी अन्य नदी में स्नान करने जा सकते हैं।  
गुरु नानक देव जी एक माहान संत तो थे ही साथ में दार्शनिक, समाज सुधारक, चिंतक, कवि और देश प्रेमी भी थे। कहा जाता है कि बचपन से ही नानक साहिब का मन सांसारिक कार्यों में नहीं लगता था। एक बालक के रूप में भगवान की तरफ ज्यादा रूचि को देखते हुए, लोगों ने इन्हें दिव्या पुरुष मानना शुरू कर दिया था। उन्होंने अनेक ग्रन्थ लिखे और समाज में सुधार करने का पूरा प्रयास किया। यहाँ हम उनके 10 लोकप्रिय दोहे साझा कर रहे हैं  –  

एक ओंकार सतिनाम, करता पुरखु निरभऊ।

नदिआ अते वाह पवही समुंदि न जाणी अहि।।

अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत।।

निरबैर, अकाल मूरति, अजूनी, सैभं गुर प्रसादि।।

सालाही सालाही एती सुरति न पाइया।

नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत।।

जगत में झूठी देखी प्रीत।

मन मूरख अजहूं नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।


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