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पैरालंपिक गेम्स 2016 में भारत का स्वर्णिम सफ़र

बैंकर्स अड्डा के प्रिय पाठकों,
रियो 2016 पैरालंपिक खेल अपनी समाप्ति के साथ ही सभी क्षेत्रों के विभिन्न प्रतियोगियों को विशेष सन्देश दे गए हैं. इन खेलों में तमाम अक्षमताओं के बावजूद हमने ऐसे कौतुहल भरे और आश्चर्यजनक प्रदर्शन देखे कि दांतों टेल उंगली दबा लें. एक ओर जहाँ रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड टूटे वहीं इन विशिष्ट दिव्यांग खिलाडियों के प्रति मन में सहज ही सम्मान और प्रेम का भाव उमड़ा. इस बार हमें खिलाड़ियों के अपार साहस, कठिन परिश्रम, अनुशासन के साथ-साथ उनके द्वारा कुछ विश्व रिकॉर्ड तोड़ने वाले प्रदर्शन देखने को मिले हैं। आइये डालते हैं इस बार के खेलों पर एक नज़र :
पैरालंपिक गेम्स 2016 में भारत का स्वर्णिम सफ़र | Bankersadda Hindi_1.1
 7-18
सितम्बर
तक चले,
 रियो 2016 पैरालंपिक खेल 2016 समाप्त हो चुके हैं.  इस बार के खेलों की समाप्ति के साथ ही
अगले पैरालंपिक की भी घोषणा कर दी गई है.
2020 समर पैरालंपिक खेल, अंतर्राष्ट्रीय
मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट का
16वां सत्र, 25 अगस्त से 6 सितम्बर 2020 तक जापान के टोक्यो में
आयोजित किया जाएगा।
 पैरालंपिक खेल दिव्यांग
खिलाड़ियों को अपने देश के प्रतिनिधित्व का समान मंच प्रदान करता है।
रियो 2016 पैरालंपिक गेम्स 
रियो 2016 में पैरालंपिक खेलों में 160 से अधिक देशों के लगभग 4,350 एथलीटों ने 22 विभिन्न खेलों में 528 पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा
की।
 डोंगी-कश्ती (canoe-kayak) और ट्रायथलन (triathlon) जैसे खेलों को 2016 के खेलों से इस आयोजन का
हिस्सा बनाया गया।
 
मैडल तालिका
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इस खेल में चीन को 239 मेडलों के साथ पहला स्थान
प्राप्त हुआ जबकि भारत को
4 मेडलों के साथ 43वां स्थान प्राप्त हुआ
रियो 2016 पैरालंपिक खेलों में
रिकार्ड प्रदर्शन
 
पॉवरलिफ्टिंग – 61 किलो
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महिलाओं की भारोत्तोलन प्रतियोगिता में, एक असाधारण रिकॉर्ड
61 किलोग्राम भारोत्तोलन का विश्व रिकॉर्ड टूटा। पहले यह रिकॉर्ड
मिश्र की फातमा ओमर ने
140 कि.ग्रा. वजन उठा कर तोड़ा और फिर नाइजीरिया की लूसी एजिके ने 142 कि.ग्रा वजन उठा कर यह रिकॉर्ड अपने
नाम किया। लूसी जिनको पोलियो है और जो व्हीलचेयर का प्रयोग करती हैं, पैरालंपिक
खेल में पांचवी बार प्रतिस्पर्धा में भाग ले रही हैं और हर बार एक पदक जीत कर अपने
देश ले जाती हैं।
सबसे तेज तैराकी 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक – SB13 महिला 
उज्बेकिस्तान की 17 वर्षीय तैराक फोतिमाखोन अमिलोवा ने 1 मिनट 12.5 सेकंड के आश्चर्यजनक समय में विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। फोतिमाखोन ने, ग्रेट ब्रिटेन के रेबेका रेड्फेन के पहले के 1 मिनट 15.96 सेकंड्स के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए यह रिकॉर्ड अपने नाम किया. रेड्फेन को इस रेस में फोतिमाखोन के साथ रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा।
 सबसे तेज तैराकी 200मी फ्रीस्टाइल – S2 पुरुष 
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चीन के 20 वर्षीय बेन्यिंग लिऊ ने 200 मी. फ्रीस्टाइल तैराकी में नया विश्व रिकॉर्ड
बना कर स्वर्ण पदक हासिल किया। 
सबसे तेज पुरुष B 4000 मी व्यक्तिगत परसूट 
ब्रिटेन की टीम के स्टीव बटे ने 4 मिनट 8.146 सेकंड के साथ एक नया विश्व
रिकॉर्ड स्थापित किया है. दांतों तले ऊँगली दबाने वाली प्रतिस्पर्धा में
 एडम दुग्गलेबी (Adam Duggleby) के नियंत्रण में इस जोड़ी ने
साइकिलिंग में स्वर्ण पदक जीता।
  
सबसे तेज 100 मी – T45/46/47 पुरुष 
ब्राजील के पेट्रुकीओ फरेरा डॉस सैंटोस ने 10.72 सेकंड के पिछले रिकॉर्ड को
तोड़कर
10.57 सेकंड का नया रिकॉर्ड बनाते
हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
सबसे तेज-1500मी T13 स्प्रिंट 
अल्जीरिया के अब्देल्लातिफ बक ने रियो पैरालिम्पिक्स में
तीन मिनट
48.29
सेकंड
के रिकॉर्ड समय में पुरुषों के
1500 मीटर T13 स्प्रिंट स्पर्धा जीती।
रियो 2016 में भारत की यात्रा
रियो 2016 में 4 पदकों के साथ भारत को 43वां स्थान प्राप्त हुआ। देवेंद्र झाझारिया ने स्वर्ण पदक जीता और रियो 2016 पैरालिम्पिक्स में भाला फेंक
F46 इवेंट में एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
 पैरालंपिक गेम्स 2016 में भारत का स्वर्णिम सफ़र | Bankersadda Hindi_6.1
दीपा मलिक महिलाओं की गोला फेंक F53 में 4.61 मीटर की व्यक्तिगत
सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ
 एक रजत पदक जीता।
पैरालंपिक गेम्स 2016 में भारत का स्वर्णिम सफ़र | Bankersadda Hindi_7.1  
मारियप्पन थान्गावेलु ने ऊंची कूद T42 वर्ग में स्वर्ण जीता। इसके
साथ
 वरुण भाटी भी कांस्य पदक
प्राप्त करने में सफल रहे।
दिव्यांगता अक्सर एक अभिशाप के रूप में देखा
जाता है
, लेकिन दुनिया के अलग-अलग
कोनों से एकत्र हुए इन एथलीटों ने अक्षम होने के बावजूद खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर
पर साबित किया है। वास्तव में शरीर में किसी अंग की कमी होना विक्लांगता नहीं है
बल्कि वास्तविक विकलांगता गलत सोच एवं दृष्टिकोण और किसी भी दिव्यांग व्यक्ति के
प्रति बुरा व्यवहार है। प्रत्येक मनुष्य कुछ विशेष गुणवत्ता और दिव्यांगता के साथ
पैदा होता है। यह एक अभिशाप नहीं बल्कि यह लाखों व्यक्तियों को आगे बढ़ने के लिए
प्रेरित करता है।
 
शुभकामनाएं


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